20201006

लाजवाब

जीवन में ऐसी सोच रखिये , जो खोया है उसका गम नहीं...

पर जो पाया है , वह किसी से कम नहीं...

जो नहीं है वह एक ख्वाब है, पर जो है वह लाजवाब है...

20200930

ईश्वर

द्रौपदी के स्वयंवर में जाते वक्त श्री कृष्ण" ने अर्जुन को समझाते हुए कहते हैं कि, हे पार्थ तराजू पर पैर संभलकर रखना, संतुलन बराबर रखना, लक्ष्य मछली की आंख पर ही केंद्रित हो उसका खास खयाल रखना, तो अर्जुन ने कहा, "हे प्रभु " सबकुछ अगर मुझे ही करना है, तो फिर आप क्या करोगे, ???


वासुदेव हंसते हुए बोले, हे पार्थ जो आप से नहीं होगा वह मैं करुंगा, पार्थ ने कहा प्रभु ऐसा क्या है जो मैं नहीं कर सकता, ??? 

वासुदेव फिर हंसे और बोले, जिस अस्थिर, विचलित, हिलते हुए पानी में तुम मछली का निशाना साधोगे, उस विचलित "पानी" को स्थिर "मैं" रखुंगा !!

कहने का तात्पर्य यह है कि आप चाहे कितने ही निपुण क्यूँ ना हो, कितने ही बुद्धिवान क्यूँ ना हो, कितने ही महान एवं विवेकपूर्ण क्यूँ ना हो, लेकिन आप स्वंय हरेक परिस्थिति के उपर पूर्ण नियंत्रण नहीँ रख सकते..... आप सिर्फ अपना प्रयास कर सकते हो, लेकिन उसकी भी एक सीमा है और जो उस सीमा से आगे की बागडोर संभलता है उसी का नाम ही ईश्वर है ..

दो प्रकार के पेड़- पौधे

 संसार में दो प्रकार के पेड़- पौधे होते हैं -


प्रथम : अपना फल स्वयं दे देते हैं,
जैसे - आम, अमरुद, केला इत्यादि ।

द्वितीय : अपना फल छिपाकर रखते हैं,
जैसे - आलू, अदरक, प्याज इत्यादि ।

जो फल अपने आप दे देते हैं, उन वृक्षों को सभी खाद-पानी देकर सुरक्षित रखते हैं, और  ऐसे वृक्ष फिर से फल देने के लिए तैयार हो जाते हैं ।

किन्तु जो अपना फल छिपाकर रखते है, वे जड़ सहित खोद लिए जाते हैं, उनका वजूद ही खत्म हो जाता हैं।

ठीक इसी प्रकार...
जो व्यक्ति अपनी विद्या, धन, शक्ति स्वयं ही समाज सेवा में समाज के उत्थान में लगा देते हैं, *उनका सभी ध्यान रखते हैं और वे मान-सम्मान पाते है।

वही दूसरी ओर

 जो अपनी विद्या, धन, शक्ति स्वार्थवश छिपाकर रखते हैं, किसी की सहायता से मुख मोड़े रखते है, *वे जड़ सहित खोद लिए जाते है, अर्थात् समय रहते ही भुला दिये जाते है।

प्रकृति कितना महत्वपूर्ण संदेश देती है, बस समझने, सोचने  की बात है।

20200914

अपने पैरों के तलवों में तेल लगाएं

किसी भी तेल, सरसों या जैतून, आदि को पैरों के तलवों और पूरे पैर पर लगायें, विशेषकर तलवों पर तीन मिनट के लिए और दाहिने पैर के तलवे पर तीन मिनट के लिए।

रात को सोते समय पैरों के तलवों की मालिश करना कभी न भूलें, और बच्चों की मालिश भी इसी तरह करें। इसे अपने जीवन के बाकी हिस्सों के लिए एक दिनचर्या बना लें। फिर प्रकृति की पूर्णता को देखें। आप अपने पूरे जीवन में कंघी करते हैं।  क्यों न पैरों के तलवों पर तेल लगाया जाए।

प्राचीन चीनी चिकित्सा के अनुसार, पैरों के नीचे लगभग 100 एक्यूप्रेशर बिंदु हैं।  उन्हें दबाने और मालिश करने से मानव अंगों को भी ठीक किया जाता है। उसे फुट रिफ्लेक्सॉजी कहा जाता है। दुनिया भर में पैरों की मालिश चिकित्सा का उपयोग किया जाता है।

20200801

आज 30-35 साल तक के बच्चों के विवाह नहीं हो रहे है? कारण क्या है ?

विवाह योग्य युवक-युवती के परिवार वाले ध्यान से पढ़े

 

       एक 24 वर्षीय  लड़की के पिताजी को नजदीक के परिजन ने एक विवाह प्रस्ताव के बारे में बताया कि लड़का शहर में नौकरी करता है। .... दिखने में सुस्वरूप है।.... अच्छे संस्कार वाला है।...  माँ बाप भी धनाढ्य और सम्पन्न हैं

 

         लड़के की उम्र 25 साल है, सब अनुरुप है। लड़की के पिताजी ने कहा कि  वो सब ठीक है पर लड़के की कमाई कितनी है?

 

मध्यस्थ ने बताया कि अच्छी है। 30 हजार रुपये है। धनाढ्य परिवार से है।

 

लड़की के पिताजी ने जवाब दिया कि हूँ !! शहर में 30 हजार से क्या होता है? परिवार की कमाई से हमें क्या लेना-देना!!

 

      मध्यस्थ ने कहा कि एक दूसरा लड़का भी है।... दिखने में ठीक ठाक है।... तनख्वाह अच्छी.... 50 हजार है। सिर्फ उसकी उम्र थोड़ी ज्यादा है। वह 28 साल का है।

 

       लडके पिताजी ने कहा कि 50 हजार ? शहर में 1BHK फ्लैट भी वह खरीद सकता है क्या!.... सिर्फ  50 हजार में?... तो मेरी बेटी को कैसे खुश रख पायेगा वो !

 

          मध्यस्थ ने हिम्मत नहीं हारी और एक बताया कि एक और भी है।.... लड़का दिखने मे ठीक ठाक है। .... सिर्फ थोड़ा मोटा है। .... थोडे से बाल झड़ गए है....दिमाग से काम करने के कारण!....  तनख्वाह भी ज्यादा है।... 1 लाख महीना है। ... पर उम्र मात्र 32 साल है  ... देखो अगर आपको जँचता हो तो!

 

        लड़की के पिताजी ने गुस्से में कहा कि क्या चाटना है 1 लाख पगार को? .... मेरी कन्या को तो सुन्दर  लड़का ही चाहिए।.... और वो भी अकेला रहने वाला या बहुत छोटा परिवार। ....कमाई भी ज्यादा होनी चाहिए, वरना लड़की को खुश कैसे रखेगा!.... मेरी लड़की भी कमाती है! .... कोई अच्छा वर बताइये जी ....लड़का कम उम्र का हो,....अच्छी पगार कमाता हो, .....घर का भी अच्छा होना चाहिए ....और दिखने मैं स्मार्ट हो!... अपने खुद के फ्लैट में रहता हो।... परिवार के साथ रहने वाला नहीं चाहिए!

 

          ऐसे ही बातो में 3 से 5 साल  निकल गए। .... फिर उसे मध्यस्थ को बुलाकर बात हुयी....

 

  मध्यस्थ ने कहा कि अब आपकी लड़की हेतु योग्य वर देखना मेरे बस की बात नही.

 

अब मेरे पास आपकी लड़की के अनुरूप 30 से 35 साल वाले लड़के ही मेरी नजर में है। आप बोलो तो बताऊ?

 

        लड़की का बाप: "कोई भी लड़का बताइये!.... इस उम्र में कही शादी हो जाये! ये क्या कम बड़ी बात है!!!.... लड़की की उम्र भी तो 29/30 हो रही है!! ....अब मेरी लड़की ही बहुत बड़ी हो गयी है... तो मैं ज्यादा क्या अपेक्षा रखू.!!

 

नोट :

 

        ऐसी बातें करके लड़की और लड़को की जिंदगी के साथ खिलवाड़ रोज देखता हूँ! अंत में समझौता ही करते देखा जाता है! ...

 

         आप अपने आस पास देखेंगे, तो पायेंगे की बहुत से लोग शादी के बाद धनवान बने है!.... क्यों की ज्योतिषीय आधार पर भी बहुत बार भाग्य शादी के बाद उदय होता है।... तो बहुत बार शादी के बाद व्यक्ति का सब कुछ चला जाता है..... इसलिए पैसे को ही एकमात्र आधार नहीं बनाये!....सिर्फ एक सवाल का उत्तर दें कि जब आपकी शादी हुई थी तब आप कितना कमाते थे? ... आज क्या आपके पास नहीं है!

 

        लड़का-लड़की को समानता का अधिकार वाले युग मे आप भी थोड़ा लड़की एवं लड़के के पीछे खड़े रहिये। पर कृपा करके लड़के-लड़कियों की शादी योग्य उम्र में करिये या होने दीजिए।

 

        ज्यादा मामलों में देखा गया है कि कमाने वाली लड़कियां या पढ़ाई करने वाली लड़कियां ही अभी पढ़ना है! का बहाना बना कर .... या काम का बहाना बनाकर जल्द विवाह नहीं करना चाहती है। .... और मां-बाप द्वारा शादी की बात करने पर घर में झगड़ा आम हो चुका है। ....अपने माता-पिता की भी भावनाये एवं इच्छाओं का ध्यान रखिए।.. .. आप भले ही डिग्री में उनसे ज्यादा हैं। ... पर आपके माता-पिता आपसे बहुत ज्यादा अनुभवी हैं।... और कोई भी अपने बच्चों के लिए गलत संबंध नहीं देखता है।

 

         कई जगह तो अच्छे लड़कों को इसलिए छोड़ दिया क्यों कि लड़कियां जॉब कर रही थी और पढ़ाई में लड़कों से ज्यादा थी।...जब कि लड़के भले ही उनसे कम पढ़े थे .... परंतु उनके जैसी सैलरी वाले तो उनके परिवारिक व्यवसाय में जॉब कर रहे थे।.... उनके पास पढ़ाई लड़की से कम भले ही था....पर परिवार और लड़के के पास सारी सुख सुविधा थी।.... परंतु उनको इसलिए नकार दिया गया, क्यों कि वे परिवारिक संयुक्त व्यापार में थे!... लड़की के परिवार को परिवारिक व्यापारी नहीं बल्कि अकेला जॉब या काम करने वाला लड़का चाहिए था!!....जब कि वे वर करोड़ों में खेल रहे थे!.... उनको पढ़ी लिखी बहु चाहिए थी! .... शादी के बाद जॉब करने वाली नहीं बल्कि परिवारिक काम में मददगार बहु!... सारी संपत्ति इनके 2 या 3 भाइयों में ही बंटती!....ऐसे सम्बंध छोड़कर जॉब वालों से शादी करने वालों को भी जानता हूँ ..... और सिर्फ जॉब ही करूंगी ! को ही मकसद बनाकर कई को कुँवारे डोलते उम्रदराज हो चुके को भी जानता हूँ!.... इन्होंने कई बेहतरीन मौके, सिर्फ इसीलिए गंवा दिए!....क्यों कि जॉब की सोच से बाहर आकर मौके को नहीं पहचाना !!... उनके माता-पिता तो तैयार थे.... पर बच्चे नहीं माने!!

 

              उम्रभर पैसा और नौकरीं तो आते-जाते रहेगी....पर "तारुण्य" और "उम्र" वापस नहीं आएगी...

 

देखिये सोच कर  

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             कृपया विवाद न करे ....ये एक सत्य विचार है....कोई इसे  व्यक्तिगत न लें।...अगर बातें सही और योग्य लगे!... तो आचरण में लाने का प्रयास करे....

 

 

 सभी के अनुभव और विचारों का स्वागत है।


20200616

रिश्ते-नाते केंद्र सम्बन्धित फाइल देखने के लिए



आप सब से अनुरोध है कि मन्दिर के खुलने तक धेर्य रखते हुए मन्दिर के दुबारा खुलने की परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करे ।
तब तक आप ऑनलाइन फॉर्म भरना चाहते हैं तो भर सकते हैं ये निशुल्क और फ़्री है 

धन्यवाद
सत्यवीर सिंह त्यागी

20200523

कटी प्याज के नुकसान

‌          
‌  मानो या ना मानो यह पूर्णतया सत्य है.
‌देर से कटी प्याज का कभी उपयोग ना करें.     प्याज हमेशा तुरंत काट कर खाएं.
‌कटी रखी प्याज दस मिनिट में  अपने आस पास के सारे कीटाणु अवशोसित कर लेती है.
यह वेज्ञानिक तौर पर सिद्ध हो चुका है.
‌जब भी किसी मौसमी बीमारी का प्रकोप फैले घर में सुबह शाम हर कमरें में प्याज काट कर रख दें.
‌ बाद में उसे फैंक दें. सुरक्षित बने रहेंगें.
‌प्याज के संबध में महत्वपूर्ण जानकारी.
‌सन 1919 में फ्लू से चार करोड़ लोग मारे जा चुके थे, तब एक डॉक्टर कई किसानों से उनके घर इस प्रत्याशा में 
‌मिला कि वो कैसे इन किसानों को इस महामारी से लड़ने में सहायता कर सकता है.बहुत सारे किसान इस फ्लू से ग्रसित थे 
‌और उनमें से बहुत से मारे जा चुके थे.डॉक्टर जब इनमें से एक किसान के संपर्क में आया तो उसे ये जान कर बहुत आश्चर्य हुआ, कि सारे गाँव के फ्लू से ग्रसित होने के बावजूद ये किसान परिवार बिलकुल स्वस्थ्य था.तब डॉक्टर को ये जानने की इच्छा जागी कि ऐसा इस किसान के परिवार ने सारे गाँव से हटकर क्या किया कि वो इस भंयकर महामारी में भीस्वस्थ्य थे.   तब किसान की पत्नी ने उन्हें बताया कि उसने अपने मकान के दोनों कमरों में ‌एक प्लेट में  छिली हुई प्याज रख दी थी तब डॉक्टर ने प्लेट में रखी इन प्याज को ‌माइक्रोस्कोप से देखा तो उसे इस प्याज में उस घातक फ्लू के बैक्टेरिया मिले जो ‌संभवतया इन प्याज द्वारा अवशोषित कर लिए गए थे और शायद यही कारण था कि ‌इतनी बड़ी महामारी में ये परिवार बिलकुल स्वस्थ्य था, क्योंकि फ्लू के वायरस इन प्याज द्वारासोख लिए गए थे.
‌जब मैंने अपने एक मित्र जो अमेरिका में रहते थे और मुझे हमेशा स्वास्थ्य संबधी मुद्दों पर  ‌बेहद ज्ञानवर्धक जानकारी भेजते रहते हैं,‌तब उन्होंने प्याज के संबध में बेहद महत्वपूर्ण जानकारी/अनुभव मुझे भेजा. उनकी इस बेहद रोचक कहानी के लिए धन्यवाद.
‌जब मैं न्यूमोनिया से ग्रसित था और कहने की आवश्यकता नहीं थी कि मैं बहुत कमज़ोर महसूस कर रहा था तब मैंने एक लेख पढ़ा था जिसमें ये बताया गया था कि प्याज को बीच से काटकर रात में  न्यूमोनिया से ग्रस्त मरीज़ के कमरे में एक जार में रख दिया गया था और सुबह यह देख कर बेहद आश्चर्य हुआ कि प्याज सुबह कीटाणुओं की वज़ह से  बिलकुल काली हो गई थी‌तब मैंने भी अपने कमरे में वैसे ही किया और देखा अगले दिन प्याज बिलकुल काली होकर खराब हो चुकी थी और मैं काफी स्वस्थ्य महसूस कर रहा था.
‌कई बार हम पेट की बीमारी से दो चार होते है तब हम इस बात से अनजान रहते है कि इस बीमारी के लिए किसे दोषी ठहराया जाए. तब नि :संदेह प्याज को इस बीमारी के लिए दोषी ठहराया जा सकता है.
‌प्याज बैक्टेरिया को अवशोषित कर लेती है यही कारण है कि अपने इस गुण के कारण प्याज हमें ठण्ड और फ्लू से बचाती है.
‌अत: वे प्याज बिलकुल नहीं खाना चाहिए जो बहुत देर पहले काटी गई हो और प्लेट में रखी गई हों. ये जान लें कि ...
‌ काट कर रखी गई प्याज बहुत विषाक्त होती हैं.
‌जब कभी भी फ़ूड पॉइसनिंग के केस अस्पताल में आते हैं तो सबसे पहले इस बात की जानकारी ली जाती कि मरीज़ ने अंतिम बार प्याज कब खाई थी. और वे प्याज कहाँ से आई थीं ,  ‌(खासकर सलाद में )
‌प्याज बैक्टेरिया के लिए चुंबक की तरह काम करती हैं  खासकर कच्ची प्याज आप कभी भी थोड़ी सी भी कटी हुई प्याज को देर तक रखने की गलती न करे ये बेहद खतरनाक हैं.
‌    यहाँ तक कि किसी बंद थैली में इसे रेफ्रिजरेटर में रखना भी सुरक्षित नहीं है.
‌प्याज ज़रा सी काट देने पर ये बैक्टेरिया से ग्रसित हो सकती है और आपके लिए खतरनाक हो सकती है. यदि आप कटी हुई प्याज को सब्ज़ी बनाने के लिए उपयोग कर रहें हो, तब तो ये ठीक है, लेकिन यदि आप कटी हुई प्याज अपनी ब्रेड पर रख कर खा रहें है तो ये बेहद खतरनाक है. ऐसी स्थिति में आप मुसीबत को न्योता दे रहें हैं. याद रखे कटी हुई प्याज और कटे हुए आलू की नमी बैक्टेरिया को तेज़ी से  पनपने में बेहद सहायक होता है.
‌कुत्तों को कभी भी प्याज नहीं खिलाना चाहिए, क्योंकि प्याज को उनका पेट का मेटाबोलिज़ कभी भी नहीं पचाता.
‌कृपया ध्यान रखे कि ...
‌प्याज को काट कर अगले दिन सब्ज़ी बनाने के लिए नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये बहुत खतरनाक है यहाँ तक कि कटी हुई प्याज एक रात में बहुत विषाक्त हो जाती है क्योंकि ये टॉक्सिक बैक्टेरिया बनाती है जो पेट खराब करने के लिए पर्याप्त रहता है.

20200205

इंसान हमसे भी अच्छा नोंचता है

बेजुबान पत्थर पे लदे है करोडो के गहने मंदिरो में,
उसी दहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हे हाथो को देखा है।।
       
सजे थे छप्पन भोगऔर मेवे  मूरत के आगे,
बाहर एक फ़कीर को भूख से तड़प के मरते देखा है।।
           
लदी हुई है रेशमी चादरों से वो हरी मजार,
पर बाहर एक बूढ़ी अम्मा को ठंड से ठिठुरते देखा है।।
        
वो दे आया एक लाख गुरद्वारे में हॉल के लिए,
घर में उसको 500 रूपये के लिए काम वाली बाई को बदलते देखा है।।
        
सुना है चढ़ा था सलीब पे कोई दुनिया का दर्द मिटाने को,
आज चर्च में बेटे की मार से बिलखते माँ बाप को देखा है।।
          
जलाती रही जो अखन्ड ज्योति देसी घी की दिन रात पुजारन,
आज उसे प्रसव में कुपोषण के कारण मौत से लड़ते देखा है।।
         
जिसने न दी माँ बाप को भर पेट रोटी कभी जीते जी,
आज लगाते उसको भंडारे मरने के बाद देखा है।।
        
दे के समाज की दुहाई ब्याह दिया था जिस बेटी को जबरन बाप ने,
आज पीटते उसी शौहर के हाथो सरे राह देखा है।।
         
मारा गया वो पंडित बे मौत सड़क दुर्घटना में यारो,
जिसे खुद को काल, सर्प, तारे और हाथ की लकीरो का माहिर लिखते देखा है।।
         
जिसे घर की एकता की देता था जमाना कभी मिसाल दोस्तों,
आज उसी आँगन में खिंचती दीवार को देखा है।।
          
बन्द कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर,
अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा।।
        
आत्म हत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर,
अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता।।
         
गिद्ध भी कहीं चले गए लगता है उन्होंने देख लिया कि,
इंसान हमसे भी अच्छा नोंचता  है।।