तीन ठेकेदार एक पुलिया की मरम्मत के ठेके के लिए बोली लगाने पहुंचे।
अधिकारी उन्हें उस पुलिया पर ले गया जिसकी मरम्मत होनी थी।
पहले ठेकेदार ने जेब से फीता निकाला, कुछ नापतौल की, कैलकुलेटर पर कुछ हिसाब लगाया और
बोला – मैं इस काम को 90000 रुपए में कर दूंगा। 40000 सामग्री के लिए, 40000 मजदूरों के लिए
और 10000 मेरे लिए।
दूसरे ठेकेदार ने भी नाप तौल की, कुछ हिसाब लगाया और बोला – 70000 रुपए। 30000 सामग्री के
लिए और 30000 मजदूरी के। बाकी 10000 मेरे।
तीसरे ठेकेदार ने न नापतौल की न हिसाब लगाया। अधिकारी के कान के पास मुंह ले जाकर कहा –
2 लाख 70000 रुपए।.
अधिकारी बोला – देख नहीं रहे। दूसरा 70000 में करने को तैयार है । कुछ नापतौल तो करो, हिसाब
तो लगाओ तब बोलो।
तीसरा ठेकेदार फिर उसके कान में फुसफुसाया – पूरी बात तो सुनिए …… । एक लाख मेरे, एक लाख
आपके और 70000 दूसरे वाले ठेकेदार के लिए जो यह काम करके देगा।.
और ठेका तीसरे ठेकेदार को दे दिया गया……
अधिकारी उन्हें उस पुलिया पर ले गया जिसकी मरम्मत होनी थी।
पहले ठेकेदार ने जेब से फीता निकाला, कुछ नापतौल की, कैलकुलेटर पर कुछ हिसाब लगाया और
बोला – मैं इस काम को 90000 रुपए में कर दूंगा। 40000 सामग्री के लिए, 40000 मजदूरों के लिए
और 10000 मेरे लिए।
दूसरे ठेकेदार ने भी नाप तौल की, कुछ हिसाब लगाया और बोला – 70000 रुपए। 30000 सामग्री के
लिए और 30000 मजदूरी के। बाकी 10000 मेरे।
तीसरे ठेकेदार ने न नापतौल की न हिसाब लगाया। अधिकारी के कान के पास मुंह ले जाकर कहा –
2 लाख 70000 रुपए।.
अधिकारी बोला – देख नहीं रहे। दूसरा 70000 में करने को तैयार है । कुछ नापतौल तो करो, हिसाब
तो लगाओ तब बोलो।
तीसरा ठेकेदार फिर उसके कान में फुसफुसाया – पूरी बात तो सुनिए …… । एक लाख मेरे, एक लाख
आपके और 70000 दूसरे वाले ठेकेदार के लिए जो यह काम करके देगा।.
और ठेका तीसरे ठेकेदार को दे दिया गया……
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