हर रिश्ता अब तो झूठा और लाचार दिखाई देता है
रिश्तों का भी अब तो एक बाजार दिखाई देता है
हर क्षण बिकते दादा मामा चाचा बुआ भाई यहां
प्यार महोब्बत भी अब तो व्यापार दिखाई देता है।
हरमिंदर पाल
रिश्तों का भी अब तो एक बाजार दिखाई देता है
हर क्षण बिकते दादा मामा चाचा बुआ भाई यहां
प्यार महोब्बत भी अब तो व्यापार दिखाई देता है।
हरमिंदर पाल
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