20190331

यज्ञ - चिता



अग्नि  पर  जब  फल,  फूल,  अनाज,  दूध,  दही,  घी,  तेल  डाला  जाता  है  तो  वो  यज्ञ बन  जाता  है  और  उसी  अग्नि  पर  जब  मुर्दा,  हड्डी,  मांस  का  शरीर  रखा  जाता  है  फिर  वो  पूरा  हो  या  कटा  हुआ  हो  तो  वो  चिता  बन  जाती  है..

हमें  भी  जब  भूख  लगती  है  तो  कहा  जाता  है  कि  हमारे  भीतर  जठराग्नि प्रज्जवलित  हुई  है  और  वो  भी  अग्नि  है  और  जब  ये  जठराग्नि  प्रज्जवलित  होती  है  तब  हम  उस  में  भी  कुछ  ना  कुछ  डालते  हैं..  अगर  हम  उस  में  चिकन,  मटन  या  मांस  का  कुछ  भी  डालते  हैं  तो  वो  चिता बन  जाती  है  और  अगर  हम  उसमें  फल,  फूल,  अनाज,  दूध,  दही,  घी,  तेल  डालते  हैं  तो  वो  यज्ञ  बन  जाता  है..

अब  आप  के  भीतर  'चिता'  हो  या  'यज्ञ'  हो,  ये  निर्णय  आप  को  करना  है..

20190326

Before you Act .......... Listen.

Before you React ........Think.
Before you Spend ........Earn.
Before you Criticize ... Wait.
Before you pray ......... Forgive.
Before you Quit ......... Try.
All Friends, Have A Nice Day.

Sacrifice

Here is a story about lord Krishna that will tell us what true love is about. Krishna, while living in Dwarka with his favourite wife Rukmani, would very often softly utter to himself, 
“O Radha… O Radha.”
Rukmani felt jealous and asked him why he kept remembering Radha so often. 
Krishna did not say anything. He just smiled.

A few days later, Krishna complained of stomach ache. 
Rukmani gave him medicines, but the pain did not go away. 
He kept moaning in pain.
Krishna told her that only a little charanamrita (blessed water) of a person who truly loved him would put an end to his agony.
 He begged Rukmani to give him some of her charanamrita. A shocked Rukmani refused: 
“how can I commit such a terrible sin? You are the lord of all that be, and if I gave you my charanamrita I would surely go to hell.”
Krishna than asked Rukmani to send an attendant to Vrindavan and try and procure some charanamrita from someone there. Soon the attendant returned with a cupful of charanamrita and as Krishna sipped it, all the pain disappeared.
He then asked the attendant, “Who gave you this charanamrita?” the attendant replied, “no one in Vrindavan was ready to give it on learning it was for lord Krishna. Then one young woman came running up to me and gave me this cup. 
Her companions cautioned her, “you fool Radha, you are committing the greatest sin. 
But she did not care. She said, “I don’t care about what happens to me but I cannot bear to see my beloved Krishna in pain.”

Krishna turned to rukmani standing by his side and said, 
“Radha is not afraid of going to hell for me.
She only thinks about me. So if Radha loves me so much, should I also not long for her?”
This is what true love is about. It is unconditional.
Sacrifice is the most important characteristics of true love.

20190305

सकारात्मक दृष्टिकोण

🌿💐🌷🌷💐🌿

*गुरू से शिष्य ने कहा: गुरूदेव ! एक व्यक्ति ने आश्रम के लिये गाय भेंट की है।*

 *गुरू ने कहा - अच्छा हुआ । दूध पीने को मिलेगा।*

 *एक सप्ताह बाद शिष्य ने आकर गुरू से कहा: गुरू जी ! जिस व्यक्ति ने गाय दी थी, आज वह अपनी गाय वापिस ले गया ।*

 *गुरू ने कहा - अच्छा हुआ ! गोबर उठाने की झंझट से मुक्ति मिली।*

 *'परिस्थिति' बदले तो अपनी 'मनस्थिति' उसके अनुकूल बदल लो। बस दुख, सुख में बदल जायेगा.।* *"सुख दुख आख़िर दोनों मन के ही तो समीकरण हैं।*

 *"अंधे को मंदिर आया देखलोग हँसकर बोले -"मंदिर में दर्शन के लिए आए तो हो, पर क्या भगवान को देख पाओगे ?*
 *"अंधे ने कहा -"क्या फर्क पड़ता है, मेरा भगवान तो मुझे देख लेगा."*

 *दृष्टि ही नहीं दृष्टिकोण भी सकारात्मक होना चाहिए। आप आनंद से सराबोर रहेंगे* 
 🙏🙏🌷💐

20190221

डिप्रेशन

डॉक्टर* : डिप्रेशन की पेशेंट से-

क्या तकलीफ़ है..?

लेडी पेशेंट : सर,  दिमाग में बहुत उल्टे पुलटे विचार आते हैं, रुकते ही नहीं...

डॉक्टर : कैसे विचार आते हैं ..?

लेडी पेशेंट : जैसे अब मैं यहाँ आई हूँ तो आपके ओपीडी में एक भी पेशेंट नहीं था.. तो मैं सोचने लगी कि डॉक्टर साहब के पास कोई भी पेशेंट नहीं है, इनकी कमाई कैसे होगी, घर कैसे चलेगा,  इतना पैसा डाला पढ़ाई में,  अब क्या करेंगे.. हॉस्पिटल बनाने में भी बहुत पैसा लगाया होगा,  अब लोन कैसे चुकाएंगे ? कहीं किसानों के माफ़िक लटक तो नहीं जाएंगे एक दिन...!! ऐसे कुछ भी विचार आते रहते हैं...

अब डॉक्टर डिप्रेशन में है।

मछली

शराब के बार" के सामने एक छोटा सा तालाब था।

झमाझम बारिश हो रही थी और
उस बारिश में पूरा भीगा हुआ एक बुज़ुर्ग आदमी एक छड़ी पकड़े था
जिससे बँधा धागा तालाब के पानी में डूबा हुआ था।

एक राहगीर ने उससे पूछा: *“क्या कर रहे हो बाबा ?”

बुज़ुर्ग: “मछली पकड़ रहा हूँ।”

राहगीर बारिश में भीगे उस बुज़ुर्ग को देख बहुत दु:खी हुआ, 
बोला :
बाबा, मैं बार में व्हिस्की पीने जा रहा हूँ।
आओ तुम्हें भी एक पैग पिलाता हूँ।
ऐसे तो तुम्हें सर्दी लग जायेगी।
आओ अंदर चलें।”

बार के गर्म माहौल में बुज़ुर्ग के साथ व्हिस्की पीते-पीते उन महाशय ने बुज़ुर्ग से पूछा:
“हाँ तो बाबा, आज कितनी मछलियाँ फँसीं?”

बुज़ुर्ग बोला : *तुम आठवीं हो, बेटा !*

20190210

बंद कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर, 

अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा।

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

आत्महत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर, 

अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता!

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

गिद्ध भी कहीं चले गए, लगता है उन्होंने देख लिया, 

कि इंसान हमसे अच्छा नोंचता है!

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

कुत्ते कोमा में चले गए, ये देखकर,

क्या मस्त तलवे चाटता है इंसान!

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

कोई टोपी, तो कोई अपनी पगड़ी बेच देता है,

मिले अगर भाव अच्छा, जज भी कुर्सी बेच देता है!

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

जला दी जाती है ससुराल में अक्सर वही बेटी, 

जिसकी खातिर बाप किडनी बेच देता है!

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

ये कलयुग है, कोई भी चीज़ नामुमकिन नहीं इसमें,

कली, फल, फूल, पेड़, पौधे सब माली बेच देता है!

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

धन से बेशक गरीब रहो, पर दिल से रहना धनवान,

अक्सर झोपड़ी पे लिखा होता है: "सुस्वागतम"

और महल वाले लिखते हैं:
"कुत्तों सॆ सावधान"

20190201

आयुर्वेद प्रभात



हमारे हाथ की पांचों उंगलियाँ शरीर के अलग अलग अंगों से जुडी होती है | इसका मतलब आप को दर्द नाशक दवाइयां खाने की बजाए इस आसान और प्रभावशाली  तरीके का इस्तेमाल करना करना चाहिए | आज इस लेख के माध्यम  से हम आपको बतायेगे के शरीर के किसी हिस्से का दर्द सिर्फ हाथ की उंगली को रगड़ने से कैसे दूर होता है |*
1. अंगूठा– The Thumb
हाथ का अंगूठा हमारे फेफड़ो से जुड़ा होता है | अगर आप की दिल की धड़कन तेज है तो हलके हाथो से अंगूठे पर मसाज करे और हल्का सा खिचे | इससे आप को आराम मिलेगा |

2. तर्जनी – The Index Finger
ये उंगली आंतों  gastro intestinal tract से जुडी होती है | अगर आप के पेट में दर्द है तो इस उंगली को हल्का सा रगड़े , दर्द गायब हो जायेगा।

3. बीच की उंगली – The Middle Finger
ये उंगली परिसंचरण तंत्र तथा circulation system से जुडी होती है | अगर आप को चक्कर या  आपका जी घबरा रहा है तो इस उंगली पर मालिश करने से तुरंत रहत मिलेगी |

4. तीसरी उंगली -- The Ring Finger
ये उंगली आपकी मनोदशा से जुडी होती है | अगर किसी कारण आपकी मनोदशा अच्छी नहीं है या शांति चाहते हो तो इस उंगली को हल्का सा मसाज करे और खिचे, आपको जल्द ही इस के अच्छे नतीजे प्राप्त हो जयेगे, आप का मूड खिल उठेगा।

5. छोटी उंगली -- The Little Finger
उंगली का किडनी और सिर के साथ सम्बन्ध होता है | अगर आप को सिर में दर्द है तो इस उंगली को हल्का सा दबाये और मसाज करे, आप का सिर दर्द गायब हो जायेगा | इसे मसाज करने से किडनी भी तंदरुस्त रहती है |

20190121

~एक शर्मनाक कड़वी सच्चाई...!!!~

नदी तालाब में नहाने में शर्म आती है,
और
स्विमिंग पूल में तैरने को फैशन कहते हैं.

गरीब को एक रुपया दान नहीं कर सकते,
और
वेटर को टिप देने में गर्व महसूस करते हैं.

माँ बाप को एक गिलास पानी भी नहीं दे सकते,
और
नेताओं को देखते ही वेटर बन जाते हैं.

बड़ों के आगे सिर ढकने में प्रॉब्लम है,
लेकिन
धूल से बचने के लिए 'ममी' बनने को भी तैयार हैं.

पंगत में बैठकर खाना दकियानूसी लगता है,
और
पार्टियों में खाने के लिए लाइन लगाना अच्छा लगता है.

बहन कुछ माँगे तो फिजूल खर्च लगता है,
और
गर्लफ्रेन्ड की डिमांड को अपना सौभाग्य समझते हैं.

गरीब की  सब्ज़ियाँ खरीदने मे इन्सल्ट होती है,
और
शॉपिंग मॉल में अपनी जेब कटवाना गर्व की बात है.

बाप के मरने पर सिर मुंडवाने में हिचकते हैं,
और
'गजनी' लुक के लिए हर महीने गंजे हो सकते हैं.

कोई पंडित अगर चोटी रखे तो उसे एन्टीना कहते हैं.
और
शाहरुख के 'डॉन' लुक के दीवाने बने फिरते हैं.

किसानों के द्वारा उगाया अनाज खाने लायक नहीं लगता,
और
उसी अनाज को पॉलिश कर के कम्पनियाँ बेचें, तो क्वालिटी नजर आने लगती है...॥

ये सब मात्र अपसंस्कृति ही नही,
देश व समाज का दुर्भाग्य भी है ।

20190111

जीवन का गहना

इंसान नीचे बैठा दौलत गिनता है
कल इतनी थी – आज इतनी बढ गयी..

ऊपर वाला हंसता है और इंसान की सांसे गिनता है…
कल इतनी थीं – आज इतनी कम हो गयीं..

दुनियां के रैन बसेरे में..
   पता नही कितने दिन रहना है,
       "जीत लें सबके दिलों को..
  बस यही जीवन का गहना है..!!"

20190108

प्रजा फिर भी चुप है

एक राजा था जिसकी प्रजा हम भारतीयों की तरह सोई हुई थी !

बहुत से लोगों ने कोशिश की प्रजा जग जाए ..
अगर कुछ गलत हो रहा है तो उसका विरोध करे,
लेकिन प्रजा को कोई फर्क नहीं पड़ता था !

राजा ने तेल के दाम बढ़ा दिये प्रजा चुप रही
राजा ने अजीबो गरीब टैक्स लगाए प्रजा चुप रही
राजा ज़ुल्म करता रहा लेकिन प्रजा चुप रही
एक दिन राजा के दिमाग मे एक बात आई उसने एक अच्छे-चौड़े रास्ते को खुदवा के एक पुल बनाया ..
जबकि वहां पुल की कतई ज़रूरत नहीं थी .. प्रजा फिर भी चुप थी किसी ने नहीं पूछा के भाई यहा तो किसी पुल की ज़रूरत नहीं है आप काहे बना रहे है ?
राजा ने अपने सैनिक उस पुल पे खड़े करवा दिए और पुल से गुजरने वाले हर व्यक्ति से टैक्स लिया जाने लगा फिर भी किसी ने कोई विरोध नहीं किया !
फिर राजा ने अपने सैनिको को हुक्म दिया कि जो भी इस पुल से गुजरे उसको 4 जूते मारे जाए और एक शिकायत पेटी भी पुल
पर रखवा दी कि किसी को अगर कोई शिकायत हो तो शिकायत पेटी मे लिख कर डाल दे लेकिन प्रजा फिर भी चुप !
राजा रोज़ शिकायत पेटी खोल कर देखता की शायद किसी ने कोई विरोध किया हो लेकिन उसे हमेशा पेटी खाली मिलती !
कुछ दिनो के बाद अचानक एक एक चिट्ठी मिली ..
राजा खुश हुआ के चलो कम से कम एक आदमी तो जागा ,,,,,
जब चिट्ठी खोली गयी तो उसमे लिखा था -
"हुजूर जूते मारने वालों की संख्या बढ़ा दी जाए ...
हम लोगो को काम पर जाने मे देरी होती है !
Aise ho gaye hai hum indian. Zara sochna is barre mein

20181214

DOWN TO EARTH

A Tree that wants
          to touch the Sky,
Must extend its
    roots into the Earth. 
The More it wants
           to Rise Upward.
The More it has
       to go Downwards.
So to rise in Life,
        Be down to Earth.  
🙏🌹🙏🌹

20181204

नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन है



एक बुजुर्ग को अचानक बांई आँख  से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर  रात को नजर न के बराबर होने लगी।जाँच करने से यह निष्कर्ष निकला कि उनकी आँखे ठीक है परंतु बांई आँख की रक्त नलीयाँ सूख रही है। रिपोर्ट में यह सामने आया कि अब वो जीवन भर देख  नहीं पायेंगे।.... मित्रो यह सम्भव नहीं है.. 

मित्रों हमारा शरीर परमात्मा की अद्भुत देन है...गर्भ की उत्पत्ति नाभी के पीछे होती है और उसको माता के साथ जुडी हुई नाडी से पोषण मिलता है और इसलिए मृत्यु के तीन घंटे तक नाभी गर्म रहती है। 

गर्भधारण के नौ महीनों अर्थात 270 दिन बाद एक सम्पूर्ण बाल स्वरूप बनता है। नाभी के द्वारा सभी नसों का जुडाव गर्भ के साथ होता है। इसलिए नाभी एक अद्भुत भाग है। 

नाभी के पीछे की ओर पेचूटी या navel button होता है।जिसमें 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां स्थित होती है।अगर सारी धमनियों को जोड़ा जाए तो उनकी लम्बाई इतनी हो जायेगी कि पृथ्वी के गोलाई पर दो बार लपेटा जा सके। 

नाभी में गाय का शुध्द घी या तेल लगाने से बहुत सारी शारीरिक दुर्बलता का उपाय हो सकता है।

1. आँखों का शुष्क हो जाना, नजर कमजोर हो जाना, चमकदार त्वचा और बालों के लिये उपाय... 

सोने से पहले 3 से 7 बूँदें शुध्द घी और नारियल के तेल नाभी में डालें और नाभी के आसपास डेढ ईंच  गोलाई में फैला देवें।

2. घुटने के दर्द में उपाय 

सोने  से पहले तीन से सात बूंद इरंडी का तेल नाभी में डालें और उसके आसपास डेढ ईंच में फैला देवें। 

3. शरीर में कमपन्न तथा जोड़ोँ में दर्द और शुष्क त्वचा के लिए उपाय :-
रात को सोने से पहले तीन से सात बूंद राई या सरसों कि तेल नाभी में डालें और उसके
 चारों ओर डेढ ईंच में फैला देवें।
  
4. मुँह और गाल पर होने वाले पिम्पल के लिए उपाय:- 

नीम का तेल तीन से सात बूंद नाभी में उपरोक्त तरीके से डालें।

नाभी में तेल डालने का कारण

हमारी नाभी को मालूम रहता है कि हमारी कौनसी रक्तवाहिनी सूख रही है,इसलिए वो उसी धमनी में तेल का प्रवाह कर देती है।

जब बालक छोटा होता है और उसका पेट दुखता है तब हम हिंग और पानी या तैल का मिश्रण उसके पेट और नाभी के आसपास लगाते थे और उसका दर्द तुरंत गायब हो जाता था। बस यही काम है तेल का। 

घी और तेल नाभी में डालते समय ड्रापर का प्रयोग करें, ताकि उसे डालने में आसानी रहे।

20181122

संस्कृत के कुछ रोचक तथ्य...



संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर आपको भारतीय होने पर गर्व होगा

आज हम आपको संस्कृत के बारे में कुछ ऐसे तथ्य बता रहे हैं,जो किसी भी भारतीय का सर गर्व से ऊंचा कर देंगे

1. संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी माना जाता है

2. संस्कृत उत्तराखंड की आधिकारिक भाषा है

3. अरब लोगो की दखलंदाजी से पहले संस्कृत भारत की राष्ट्रीय भाषा थी

4. NASA के मुताबिक, संस्कृत धरती पर बोली जाने वाली सबसे स्पष्ट भाषा है

5. संस्कृत में दुनिया की किसी भी भाषा से ज्यादा शब्द है वर्तमान में संस्कृत के शब्दकोष में 102 अरब 78 करोड़ 50 लाख शब्द है

6. संस्कृत किसी भी विषय के लिए एक अद्भुत खजाना है जैसे हाथी के लिए ही संस्कृत में 100 से ज्यादा शब्द है।

7. NASA के पास संस्कृत में ताड़पत्रो पर लिखी 60,000 पांडुलिपियां है जिन पर नासा रिसर्च कर रहा है

8. फ़ोबर्स मैगज़ीन ने जुलाई,1987 में संस्कृत को Computer Software के लिए सबसे बेहतर भाषा माना था

9. किसी और भाषा के मुकाबले संस्कृत में सबसे कम शब्दो में वाक्य पूरा हो जाता है

10. संस्कृत दुनिया की अकेली ऐसी भाषा है जिसे बोलने में जीभ की सभी मांसपेशियो का इस्तेमाल होता है

11. अमेरिकन हिंदु युनिवर्सिटी के अनुसार संस्कृत में बात करने वाला मनुष्य बीपी, मधुमेह,कोलेस्ट्रॉल आदि रोग से मुक्त हो जाएगा संस्कृत में बात करने से मानव शरीरका 
तंत्रिका तंत्र सदा सक्रिय रहता है जिससे कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश (Positive Charges) के साथ सक्रिय हो जाता है

12. संस्कृत स्पीच थेरेपी में भी मददगार है यह एकाग्रता को बढ़ाती है

13. कर्नाटक के मुत्तुर गांव के लोग केवल संस्कृत में ही बात करते है

14. सुधर्मा संस्कृत का पहला अखबार था, जो 1970 में शुरू हुआ था

आज भी इसका ऑनलाइन संस्करण उपलब्ध है।

15. जर्मनी में बड़ी संख्या में संस्कृतभाषियो की मांग है जर्मनी की 14 यूनिवर्सिटीज़ में संस्कृत पढ़ाई जाती है

16. नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार जब वो अंतरिक्ष ट्रैवलर्स को मैसेज भेजते थे तोउनके वाक्य उलट हो जाते थे इस वजह से मैसेज का अर्थ ही बदल 
जाता था उन्होंले कई भाषाओं का प्रयोग किया लेकिन हर बार यही समस्या आई

आखिर में उन्होंने संस्कृत में मैसेज भेजा क्योंकि संस्कृत के वाक्य उल्टे हो जाने पर भी अपना अर्थ नही बदलते हैं।
जैसे
अहम् विद्यालयं गच्छामि। 
विद्यालयं  गच्छामि अहम्। 
गच्छामिअहम् विद्यालयं ।
उक्त तीनो के अर्थ में कोई अंतर नहीं है।

17. आपको जानकर हैरानी होगी कि Computer द्वारा गणित के सवालो को हल करने वाली विधि यानि Algorithms संस्कृत में बने है ना कि अंग्रेजी में।

18. नासा के वैज्ञानिको द्वारा बनाए जा रहे 6th और 7th जेनरेशन Super Computers संस्कृतभाषा पर आधारित 
होंगे जो 2034 तक बनकर तैयार हो जाएंगे

19. संस्कृत सीखने से दिमाग तेज हो जाता है और याद करने की शक्ति बढ़ जाती है इसलिए London और Ireland के कई स्कूलो में संस्कृत को Compulsory Subject बना दिया है।

20. इस समय दुनिया के 17 से ज्यादा देशो की कम से कम एक University में तकनीकी शिक्षा के कोर्सेस में संस्कृत पढ़ाई जाती है।

वरिष्ठ नागरिक 60-70 से ऊपर की उम्र के Senior Citizen



आप जानते है कि मन चाहे कितना भी जोशीला हो, साठ की उम्र होने पर यदि आप अपने आप को फुर्तीला ओर ताकतवर समझते हैं लेकिन वास्तव में ढलती उम्र के साथ तन उतना ताकतवर और फ़ुर्तीला नहीं रह जाता ।

आपका शरीर ढलान पर है, जिससे ‘हड्डियां व जोड़ कमज़ोर होते है लेकिन मन भ्रम बनाये रखता है कि ये काम मैं चुटकी में कर लूँगा । पर जल्द सच्चाई सामने आ जाती है लेकिन एक नुक़सान के साथ ।


धोखा तब होता है जब मन सोचता है मैं कर लूंगा और शरीर करने से चूक जाता है। परिणाम एक एक्सीडेंट और शारीरिक क्षति
यह क्षति फ़्रैक्चर से लेकर हेड इंज्यूरी तक हो सकती है? कभी-कभी कभी जान लेवा भी हो जाती है ?
इसलिये हमेशा हड़बड़ी में रहने और काम करने की   अपनी आदतें बदल डालें ।
भ्रम न पालें, सावधानी बरतें क्योंकि अब आप पहले की तरह फ़ुर्तीले नहीं हैं, छोटी सी चूक भी कभी बड़े नुक़सान का कारण बन सकती है
सुबह नींद खुलते ही तुरंत बिस्तर छोड़ खड़े न हों, क्योंकि आँखे खुल जाती हैं लेकिन शरीर एंव नसों का रक्त प्रवाह पूर्ण चैतन्य अवस्था मे नहीं हो पाता
अतः पहले बिस्तर पर कुछ मिनट बैठे रहें और पूरी तरह चैतन्य हो लें। कोशिश करें कि बैठे बैठे ही स्लीपर ,चप्पलें पैर में डालें और खड़े होने के लिये कोई सहारा लें ।अक्सर यही समय होता है डगमगा कर गिर जाने का ?
□ □ गिरने की सबसे अधिक घटनाएँ बॉथरूम / वॉशरूम या टॉयलेट में ही होतीं हैं 
आप चाहे अकेले हों  पति/पत्नी के साथ हों या संयुक्त परिवार में हों, बॉथरूम में अकेले ही होते हैं

यदि आप घर में अकेले रहते हैं, तो अतिरिक्त सावधानी बरतें क्योंकि गिरने पर यदि उठ न सके तो दरवाज़ा तोड़कर ही आप तक सहायता पहुँच सकेगी, वह भी तब जब आप पड़ोसी तक समय से सूचना पहुँचाने में सफल हो सकेंगे ? याद रखें बाथरूम में भी मोबाइल साथ हो ताकि समय पर काम आ सके।

देशी शौचालय के बदले हमेशा यूरोपियन कमोड वाले शौचालय ही इस्तेमाल करें ? यदि न हो , तो समय रहते बदलवा लें क्योंकि आवश्यकता पड़नी ही है , चाहे कुछ समय बाद ही पड़े ? ●
संभव हो तो कमोड के पास एक हैंडिल लगवा लें !
कमज़ोरी की स्थिति में यह आवश्यक हो जाता है।
बाजार में प्लास्टिक के वैक्यूम हैंडिल भी मिलते हैं , जो टॉइल जैसी चिकनी सतह पर भी चिपक जाते हैं ,पर इन्हें इस्तेमाल करने से पहले खींचकर ज़रूर परख लें । ●●

हमेशा आवश्यक ऊँचे स्टूल पर बैठकर ही नहायें ।
बॉथरूम के फ़र्श पर रबर की मैट ज़रूर बिछा कर रखें ताकि आप फिसलन से बच सकें।
गीले हाथों से टाइल्स लगी दीवार का सहारा न लें, हाथ फिसलते ही आप डिसबैलेंस होकर गिर सकते हैं ।
बॉथरूम के ठीक बाहर सूती मैट भी रखें जो गीले तलवों से पानी सोख ले।
कुछ समय उस पर खड़े रह कर फिर फ़र्श पर पैर रखें वह भी सावधानी से । 
अंडरगारमेंट हों या कपड़े, अपने चेंजरूम या बेडरूम में ही आकर पहनें। अंडरवियर, पजामा या पैंट खडे़ खडे़ कभी नहीं पहनें  ●●
हमेशा दीवार का सहारा लेकर या बैठकर ही उनके पायचों मे पैर डालें, फिर खड़े होकर पहनें, वर्ना दुर्घटना घट सकती है, कभी कभी स्मार्टनेस की बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ती है। 
अपनी दैनिक ज़रूरत की चीज़ों को नियत जगह पर ही रखने की आदत डाल लें, जिससे उन्हें आसानी से उठाया या तलाशा जा सके ।

भूलने की ज़्यादा आदत हो, तो आवश्यक चीज़ों की लिस्ट मेज़ या दीवार पर लगा लें एवम घर से निकलते समय एक निगाह उस पर डाल लें, आसानी रहेगी ।
जो दवाएँ रोज़ लेनी हैं उनको प्लास्टिक के प्लैनर में रखें जिससे जुड़ी हुई डिब्बियों में हफ़्ते भर की दवाएँ दिनवार रखी जाती हैं ।अकसर भ्रम होता है कि दवाएँ ले ली हैं या भूल गये।प्लॉनर में से दवा खाने मे चूक नहीं होगी । ●●
सीढ़ियों से चढ़ते उतरते समय सक्षम होने पर भी हमेशा रेलिंग का सहारा लें, ख़ासकर ऑटोमैटिक सीढ़ियों पर । ध्यान रहे आपका शरीर आपके मन का अब ओबीडियेंट सर्वेंट नहीं रहा ।
बढ़ती आयु में कोई भी ऐसा कार्य जो आप सदैव करते रहे हैं, उसको बन्द नहीं करना चाहिये । कम से कम अपने से सम्बन्धित अपने कार्य स्वयं ही करें ।
नित्य प्रातःकाल घर से बाहर निकलने, पार्क में जाने की आदत न छोड़ें, छोटी मोटी कसरत भी करते रहें। नहीं तो आप योग व व्यायाम से दूर होते जाएंगे और शरीर के अंगों की सक्रियता ओर लचीला पन कम होती जायेगा । हर मौसम में कुछ योग-प्राणायाम अवश्य करते रहें ।
घर में या बाहर हुक्म चलाने की आदत छोड़ दें । अपना पानी, भोजन, दवाई इत्यादि स्वयं लें जिससे सक्रियता बनी रहे । बहुत आवश्यक होने पर ही दूसरों की सहायता लेनी चाहिए । 
■■ घर में छोटे बच्चे हों तो उनके साथ अधिक समय बितायें लेकिन उनको अधिक टोका-टोकी न करें ।
उनको प्यार से सिखायें । ध्यान रखें कि आपको सबसे एडजस्ट करना है न कि सबको आपसे ■■

एक मूल मंत्र सदैव उपयोग करें।    
स्वाद पर नियंत्रण रखें ।   
कम से कम एवं आवश्यकता होने पर ही बोलें।   
अपनी दखलंदाजी कम कर दें।                 
इन मूल मंत्र को जीवन में उतारते ही वृद्धावस्था प्रभु का वरदान बन जायेगी जिसका बहुत कम लोग उपभोग कर पाते हैं ।