20171210

दांत दर्द के घरेलू उपचार

अमरूद की पत्तियां 
अमरूद की पत्त‍ियों में एंटीमिक्रोबिअल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाया जाता है जो दांत दर्द में दवा की तरह काम करती हैं।पत्तियों को उबालकर इस पानी को माउथवॉश की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

प्याज 
प्याज में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-सेप्ट‍िक गुण पाए जाते हैं, दांतों में दर्द होने पर इससे आराम मिलता है। यह मसूड़ों को भी इंफेक्शन से सुरक्षित रखने में मददगार है।,

लहसुन 
लहसुन में एंटीऑक्सिडेंट, एंटीबायोटिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी और दूसरे कई औषधीय गुण पाए जाते हैं जो दांत दर्द में दवा की तरह काम करते हैं। यह मुंह के बैक्टीरिया को भी पनपने नहीं देता है।  दांत दर्द होने पर लहसुन की कलियां चबाएं।

 लौंग
 लौंग मेंअनेस्थेटिक और एनाल्जेसिक के गुण आपके दर्द को शांत करने में मदद करेगा। इसके एंटी-सेप्टिक और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी इंफेक्शन नहीं होने देता है।  जिस दांत के बीच दर्द हो रहा हो वहां एक लौंग दबा कर रखें जिससे तुरंत आराम मिलेगा।

20170905

ग़ज़ल

इश्क़ में तू गीत गाना सीख ले
गीत के संग इक तराना सीख ले
क्या करेगा ज़र ज़मीं को जोड़कर
प्यार की दौलत कमाना सीख ले
हौंसला कुछ इस तरह से ओढ़ ले
दर्द में भी मुस्कुराना सीख ले
आफ़तों या मुश्किलों के दौर में
गीत कोई गुनगुनाना सीख ले
दे रहा तू प्यार अपनो को मगर
ग़ैर को अपना बनाना सीख ले
ग़म भुलाने है तुझे जो आजकल
मयक़दे में आना जाना सीख ले
     -  हरमिंदर पाल दिल्ली 

20170831

मखाना FOXNUT



आप मखाने के चार दानों का सेवन करके शुगर से हमेशा के लिए निजात पा सकते है। इसके सेवन से शरीर में इंसुलिन बनने लगता है और शुगर की मात्रा कम हो जाती है। फिर धीरे-धीरे शुगर रोग भी खत्म हो जाता है।

सेवन की विधि
अगर आप जल्द से जल्द मधुमेह को खत्म करना चाहते है तो सुबह खाली पेट चार दाने मखाने खाएं। इनका सेवन कुछ दिनों तक लगातार करें। इससे मधुमेह का रोग तेजी से खत्म होगा।

दिल के लिए फायदेमंद
मखाना केवल शुगर के मरीज के लिए ही नहीं बल्कि हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों में भी फायदेमंद है। इनके सेवन से दिल स्वस्थ रहता है और पाचन क्रिया भी दुरूस्त रहती है।

तनाव कम
मखाने के सेवन से तनाव दूर होता है और अनिद्रा की समस्या भी दूर रहती है। रात को सोने से पहले दूध के साथ मखानों का सेवन करें।

जोड़ों का दर्द दूर
मखाने में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। इनका सेवन जोड़ों के दर्द, गठिया जैसे मरीजों के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है।

पाचन में सुधार
मखाना एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होता है जो सभी आयु वर्ग के लोगों को आसानी से पच जाता है। इसके अलावा फूल मखाने में एस्‍ट्रीजन गुण भी होते हैं जिससे यह दस्त से राहत देता है और भूख में सुधार करने के लिए मददगार है।

किडनी को मजबूत
फूल मखाने में मीठा बहुत कम होने के कारण यह स्प्लीन को डिटॉक्‍सीफाइ करता है। किडनी को मजबूत बनाने और ब्‍लड को बेहतर रखने के लिए खानों का नियमित सेवन करें।

तालाब, झील, दलदली क्षेत्र के शांत पानी में उगने वाला मखाना पोषक तत्वों से भरपुर एक जलीय उत्पाद है।

20170707

शक्ति (देवी)

शक्ति, ईश्वर की वह कल्पित माया है जो उसकी आज्ञा से सब काम करनेवाली और सृष्टिरचना करनेवाली मानी जाती है। यह अनंतरूपा और अनंतसामर्थ्यसंपन्ना कही गई है। यही शक्ति जगत्रूप में व्यक्त होती है और प्रलयकाल में समग्र चराचर जगत् को अपने में विलीन करके अव्यक्तरूपेण स्थित रहती है। यह जगत् वस्तुत: उसकी व्यवस्था का ही नाम है।

गीता में वर्णित योगमाया यही शक्ति है जो व्यक्त और अव्यक्त रूप में हैं। कृष्ण 'योगमायामुवाश्रित:' होकर ही अपनी लाला करते हैं। राधा उनकी आह्वादिनी शक्ति है। शिव शक्तिहीन होकर कुछ नहीं कर सकते। शक्तियुक्त शिव ही सब कुछ करने में, न करने में, अन्यथा करने में समर्थ होते हैं। इस तरह भारतीय दर्शनों में किसी न किसी नाम रूप से इसकी चर्चा है। पुराणों में विभिन्न देवताओं की विभिन्न शक्तियों की कल्पना की गई है। इन शक्तियों को बहुधा देवी के रूप में और मूर्तिमती माना गया है। जैसे, विष्णु की कीर्ति, कांति, तुष्टि, पुष्टि आदि; रुद्र की गुणोदरी, गोमुखी, दीर्घजिह्वा, ज्वालामुखी आदि। मार्कण्डेयपुराण के अनुसार समस्त देवताओं की तेजोराशि देवी शक्ति के रूप में कही गई है जिसकी शक्ति वैष्णवी, माहेश्वरी, ब्रह्माणी, कौमारी, नारसिंही, इंद्राणी, वाराही आदि हैं। उन देवों के स्वरूप और गुणादि से युक्त इनका वर्णन प्राप्त होता है।

तंत्र के अनुसार किसी पीठ की अधिष्ठात्री देवी शक्ति के रूप में कही गई है, जिसकी उपासना की जाती है। इसके उपासक शाक्त कहे जाते हैं। यह शक्ति भी सृष्टि की रचना करनेवाली और पूर्ण सामर्थ्यसंपन्न कही गई है। बौद्ध, जैन आदि संप्रदायों के तंत्रशास्त्रों में शक्ति की कल्पना की गई है, इन्हें बौद्धाभर्या भी कहा गया है। तांत्रिकों की परिभाषा में युवती, रूपवती, सौभाग्यवती विभिन्न जाति की स्त्रियों को भी इस नाम से कहा गया है और विधिपूर्वक इनका पूजन सिद्धिप्रद माना गया है।

प्रभु, मंत्र और उत्साह नाम से राजाओं की तीन शक्तियाँ कही गई हैं। कोष और दंड आदि से संबंधित शक्ति प्रभुशक्ति, संधिविग्रह आदि से संबंधित मंत्रशक्ति और विजय प्राप्त करने संबंधी शक्ति को उत्साह शक्ति कहा गया। राज्यशासन की सुदृढ़ता के निमित्त इनका होना आवश्यक कहा गया है।

शब्द के अंतर्निहित अर्थ को व्यक्त करने का व्यापार शब्दशक्ति नाम से अभिहित है। ये व्यापार तीन कहे गए हैं - अभिधा, लक्षणा और व्यंजना। आचार्यों ने इसे शक्ति और वृत्ति नाम से कहा है। घट के निर्माण में मिट्टी, चक्र, दंड, कुलाल आदि कारण है और चक्र का घूमना शक्ति या व्यापार है और अभिधा, लक्षणा आदि व्यापार शक्तियाँ हैं। मम्मट ने व्यापार शब्द का प्रयोग किया है तो विश्वनाथ ने शक्ति का। 'शक्ति' में ईश्वरेच्छा के रूप में शब्द के निश्चित अर्थ के संकेत को माना गया है। यह प्राचीन तर्कशास्त्रियों का मत है। बाद में 'इच्छामात्र' को 'शक्ति' माना गया, अर्थात् मनुष्य की इच्छा से भी शब्दों के अर्थसंकेत की परंपरा को माना। 'तर्कदीपिका' में शक्ति को शब्द अर्थ के उस संबंध के रूप में स्वीकार किया गया है जो मानस में अर्थ को व्यक्त करता है।

ऐ मालिक तेरे बन्दे हम


ऐ मालिक तेरे बन्दे हम
ऐसे हों हमारे करम
नेकी पर चलें और बदी से टलें
ताकि हंसते हुए निकले दम

ये अंधेरा घना छा रहा
तेरा इंसान घबरा रहा
हो रहा बेखबर, कुछ न आता नज़र
सुख का सूरज छुपा जा रहा
है तेरी रोशनी में जो दम
तो अमावस को कर दे पूनम
नेकी पर चलें और बदी से टलें
ताकि हंसते हुए निकले दम

जब ज़ुल्मों का हो सामना
तब तू ही हमें थामना
वो बुराई करें, हम भलाई भरें
नहीं बदले की हो कामना
बढ़ उठे प्यार का हर कदम
और मिटे बैर का ये भरम
नेकी पर चलें और बदी से टलें
ताकि हंसते हुए निकले दम

बड़ा कमज़ोर है आदमी
अभी लाखों हैं इसमें कमी
पर तू जो खड़ा, है दयालू बड़ा
तेरी किरपा से धरती थमी
दिया तूने हमें जब जनम
तू ही झेलेगा हम सबके ग़म
नेकी पर चलें और बदी से टलें
ताकि हंसते हुए निकले दम

20170116

रिश्ता

हर रिश्ता अब तो झूठा और लाचार दिखाई देता है
रिश्तों का भी अब तो एक बाजार दिखाई देता है
हर क्षण बिकते दादा मामा चाचा बुआ भाई यहां
प्यार महोब्बत भी अब तो व्यापार दिखाई देता है।
                       हरमिंदर पाल